भारतीय जनता पार्टी: एक के बाद एक ढहते गढ़

A decorated structure in the shape of party symbol ‘lotus’ at BJP’s new headquarters in New Delhi. Credit – PTI photo by Manvender Vashist

गुटबंदी की शिकार पार्टी का  नेतृत्व हालात से निबट पाने में नाकाम

Groupism weakens BJP

NK SINGH

Published in India Today (Hindi) 6-20 November 1996

कांगे्रस की जगह लेने का सपना देखने वाली भारतीय जनता पार्टी अपने गढ़ में ही ध्वस्त होती नजर आ रही है। गुजरात में कांग्रेस की मदद से सरकार बनाकर विद्रोही भाजपा नेता शंकर सिंह वाघेला ने आत्ममुग्ध केंद्रीय नेतृत्व को करारा तमाचा मारा है।

उत्तर प्रदेश चुनाव में निराशा जनक नतीजों के बाद गुटबंदी के दलदल में फंसी पार्टी सरकार बनाने की जोड़-तोड़ में भी नाकामयाब नजर आ रही है। पर इनसे सबक लेने की जगह दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे उसके गढ़ों में भी आपसी कलह नई ऊचाइयां छू रही है। Continue reading “भारतीय जनता पार्टी: एक के बाद एक ढहते गढ़”

अटल बिहारी वाजपेयी: अपनों में बेगाना नेता

India Today (Hindi) 31 May 1996

Atal Bihari Vajpayee : Lonely at the Top

NK SINGH

अटल बिहारी वाजपेयी के नई दिल्ली स्थित रायसीना रोड निवास के बडे़-से भोजन कक्ष में पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव की फ्रेम  में जड़ी एक तस्वीर सजी है।

कमरे का यह नजारा भारत के नए प्रधानमंत्री की एक ऐसे नेता के रूप में झलक देता है जिसकी पार्टी अपने से इतर समझदारी का अस्तित्व स्वीकार नहीं करती।

71 वर्षीय वाजपेयी सार्वजनिक जीवन के पांच दशकों में आम सहमति की राजनीति के उपासक रहे हैं।

हिंदुत्ववादियों की पाषाण-हृदय बिरादरी में वे अकेले नरम दिल नेता हैं। वे किसी के मर्म पर वार नहीं कर सकते और यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

विडंबना देखिए कि यही उनकी सबसे बड़ी खूबी भी है। Continue reading “अटल बिहारी वाजपेयी: अपनों में बेगाना नेता”