सवर्ण वोट मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में गेम चेंज़र बन सकते हैं

Dainik Bhaskar 9 October 2018

Upper caste votes may prove game changer in Madhya Pradesh

NK SINGH

विधान सभा चुनाव की विधिवत घोषणा भले ही ६ अक्टूबर को हुई हो, पर मध्यप्रदेश में इसकी बिसात जुलाई में ही बिछ चुकी थी, जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी जन आशीर्वाद यात्रा शुरु की.

उस दिन से ही भाजपा और कांग्रेस अखाड़े में ताल ठोंक रहे हैं. इन 12 हफ़्तों में प्रदेश की राजनीति ने दो दिलचस्प करवटें ली हैं.

छह अक्टूबर को जिस दिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी दोनों मध्यप्रदेश के चुनावी दौरे कर रहे थे, दूर लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कांग्रेस से नाता तोड़ने की घोषणा कर रहे थे: “कब तक इंतजार करें, एमपी में हम चौथे नंबर की पार्टी हैं.”

एक सप्ताह पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती कांग्रेस को बाय-बाय कर चुकी थीं. पिछले चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि बसपा के साथ आने से कांग्रेस को लगभग ४५ सीटों पर फायदा मिल सकता था.

समझा जाता था कि भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस दूसरी पार्टियों को साथ लेकर इलेक्शन लड़ेगी ताकि सरकार-विरोधी वोटों का बंटवारा न हो.

राजनीति में दो और दो हमेशा चार नहीं होते, चालीस भी हो सकते हैं. परसेप्शन का अपना महत्व होता है. वह हवा बनाने का काम करता है. Continue reading “सवर्ण वोट मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में गेम चेंज़र बन सकते हैं”

मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव 2018, ब्रांड शिवराज की कसौटी

Shivraj Singh Chouhan, pic courtesy MP BJP

2018 MP Assembly election a test for Brand Shivraj

NK SINGH

२००३ के विधान सभा चुनाव प्रचार की आखिरी शाम. कार ओरछा के रास्ते गड्ढों में हिचकोले ले रही थी. रात के अँधेरे को चीरती हेडलाइट की रोशनी सड़क के किनारे पड़े गिट्टी के ढेरों पर पड़ी. दिग्विजय सिंह उस तरफ इशारा करते हुए बोले, “चुनाव के बाद सड़क का काम शुरू हो जायेगा.”

सड़क की मरम्मत तो हुई. पर तबतक दिग्विजय सिंह मुख्य मंत्री नहीं थे. उनकी जगह उमा भारती आ गयी थीं.

लालू यादव से प्रभावित दिग्विजय सिंह का खयाल था कि डेवलपमेंट से वोट नहीं मिलते. पर उनकी सोशल इंजीनियरिंग धरी की धरी रह गयी. दलित एजेंडा का पांसा उल्टा पड़ गया. गांवों में सवर्ण और ओबीसी लामबंद हो गए.

पर उस चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के पहले दिग्विजय सिंह ने एक और काम किया था —- मध्य प्रदेश को दो हिस्सों में बाँटने का. आनन-फानन में असेंबली से प्रस्ताव पास करा कर सन २००० में छत्तीसगढ़ बना.

नए राज्य ने न केवल मध्य प्रदेश का राजनीतिक भूगोल बदल दिया बल्कि उसके राजनीतिक इतिहास को भी प्रभावित किया.

पहले प्रदेश में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच वोटों का अंतर आम तौर पर एक से तीन प्रतिशत के बीच हुआ करता था. पर छत्तीसगढ़ बनने के बाद वह बढ़कर ८ % से भी ज्यादा हो गया.

२००३ की हार के बाद कांग्रेस लगातार कमजोर होती चली गयी और भाजपा मजबूत. कांग्रेस के वोटों में लगभग ६ % की गिरावट आई.

दूसरी तरफ, भाजपा के विधायकों जीतने का औसत मार्जिन बढ़कर दोगुने से ज्यादा हो गया. भाजपा का जनाधार बढ़ा ही, उसने नए इलाकों पर भी कब्ज़ा किया. अपने पारंपरिक गढ़ मालवा-निमाड़ और मध्य भारत के साथ-साथ वह महाकौशल और बुंदेलखंड में भी मजबूत होकर उभरी.

मध्य प्रदेश में राजनीति की धूरी कांग्रेस से खिसककर भाजपा के पास आ गयी है. पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े देखें तो भाजपा को सत्ता से हटाना तभी मुमकिन है अगर उसके खिलाफ कोई कोई हवा चले. Continue reading “मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव 2018, ब्रांड शिवराज की कसौटी”

हम हैं माई के लाल : शिवराज को चुनौती

Hum Hain Mai Ke Laal

MP’s caste cauldron

NK SINGH

मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सार्वजनिक सभाओं में बड़े ही अंदाज से भाषा का रंग दिखाते हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 2016 में शिडयूल कास्ट और शिडयूल ट्राइब के सरकारी कर्मचारियों को आरक्षण के आधार पर तरक्की देने में रोक लगाई थी।

इसके बाद इस समुदाय के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की एक बैठक में बोलते हुए उन्होंने उन्हें भरोसा दिया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आरक्षण जारी रहेगा। चौहान ने खुली चुनौती दी ‘कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता’।

इस सप्ताह मध्यप्रदेश के ज़्यादातर हिस्सों में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति कानून में संशोधन पर बंद रहा। चौहान के पुराने निर्वाचन क्षेत्र विदिशा में आंदोलनकारियों ने टी-शर्ट पहन रखी थी जिस पर लिखा था ‘हम है माई का लाल’। काले रंग की टीशर्ट पर लिखी यह इबादत हर तरह मुख्यमंत्री के ही खिलाफ जाती थी। यह टीशर्ट राज्य के कई हिस्सों में पहने हुए आंदोलनकारी देखे गए। उधर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कानून पर आंदोलन तेज होता गया। Continue reading “हम हैं माई के लाल : शिवराज को चुनौती”

Chouhan’s risky gameplan on SC/ST Act

DB Post 22 Sept 2018

 

NK SINGH

The beleaguered chief minister of Madhya Pradesh, Shivraj Singh Chouhan, made a surprise announcement this week that has far-reaching political consequences in the poll-bound state.

In an obvious attempt to douse the prairie fire ignited by the aggressive movement against the amended SC/ST Act, the CM said that his government would not allow the law to be misused in the state. “There would not be any arrest without investigation,” he announced.

Chouhan’s statement came, significantly, a day after RSS chief Mohan Bhagwat, BJP’s ideological fountainhead, expressed his opinion on the controversy surrounding the “misuse” of the Act for prevention of atrocities against scheduled castes and tribes. Continue reading “Chouhan’s risky gameplan on SC/ST Act”