तो माट साब जेल में चक्की पीस रहे होते

Children cleaning their school in Singapore

Media promotes wrong values

NK SINGH

Published in Prabhat Kiran and Pradeepak, September 2015

Updated 7 March 2022

गंगौर गांव के प्राइमरी स्कूल की छत उन दिनों खपरैल की हुआ करती थी. पर फर्श कच्ची थी. प्रार्थना के बाद हमारा पहला काम होता था दोनों कमरों को बुहारना. हफ्ते में एक दिन, हर शनिवार को, बच्चे आस-पास से गोबर इकठ्ठा करते थे और फर्श को लीपते थे. काम बढ़ जाता था, इसलिए वह दिन खास होता था. Continue reading “तो माट साब जेल में चक्की पीस रहे होते”

मीडिया मैनेजमेंट के ताजा नुस्खे

Wikileaks founder Julian Assange has been languishing in prison for 10 years for exposing wrong-doings by several Governments around the world.

Establishment & Media

NK SINGH

Published in Subah Savere, 31 July 2015

पिछले सप्ताह मीडिया की आजादी पर एक और हमला हुआ। दिल्ली में गृह मंत्रालय ने पत्रकारों से बात करने पर अपने आला अफसरों पर पाबंदी लगा दी। गृह मंत्रालय ने एक आदेश में कहा है कि अतिरिक्त महानिदेशक (मीडिया) के अलावा कोई भी अफसर पत्रकारों से बात नहीं करेगा। पत्रकारों से भी कहा गया है कि वे नॉर्थ ब्लॉक के कमरा नंबर नौ के अलावा कहीं भी अफसरों से मुलाक़ात नहीं कर सकेंगे। यहाँ तक कि होम सेक्रेटरी भी सीधे पत्रकारों से बात नहीं करेंगे।

कुल मिलाकर शाम को अनौपचारिक बैठकों में गर्म चाय के प्याले (और कभी-कभार भजिए) के साथ मसालेदार खबरें परोसने के पहले अफसरों को अपनी नौकरी, कंडक्ट रुल्स और ओफिसियल सीक्रेट एक्ट याद करना होगा। Continue reading “मीडिया मैनेजमेंट के ताजा नुस्खे”

Managing Media, Modi Style

Narendra Modi loves cameras, hates ‘newstraders’. Pic by Narendra Bisht

 NK SINGH

Published on 15 August 2015

Everyone wants to manage the media —- governments, corporate houses, political players and, of course, the media barons themselves. Practically everyone with a stake in the power game wants its fingers on the control button. But it is easier said than done. The Watergate case bears testimony to the fact that managing media is a difficult task even for the most powerful people. Continue reading “Managing Media, Modi Style”

क्यों नहीं चलते हैं मध्य प्रदेश में अंग्रेजी के अखबार

Madhya Pradesh is a graveyard of English newspapers

NK SINGH

Published in Subah Savere, 7 August 2015 

भोपाल से महज 160 किलोमीटर दूर हरदा में चार अगस्त की रात को एक भीषण रेल हादसा हुआ. जैसा कि स्वाभाविक है, अगली सुबह भोपाल के ज्यादातर बड़े अख़बारों में यह खबर पहले पन्ने पर थी.

सीमित साधनों वाले कुछ छोटे अख़बार, खासकर वे अख़बार जिनके पास अपना छापाखाना नहीं है, जरूर इस महत्वपूर्ण खबर को नहीं छाप पाए. खबर न छापने वालों में यह दैनिक भी शामिल है. (वैसे सुबह-सवेरे अपने आप को “दैनिक समाचार पत्रिका” कहता है.)

भोपाल के जिन दो बड़े समाचार पत्रों में हरदा हादसे की खबर उस दिन नहीं छपी, वे हैं —- हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ़ इंडिया. यह दोनों कोई छोटे-मोटे सीमित साधनों वाले अख़बार नहीं है. Continue reading “क्यों नहीं चलते हैं मध्य प्रदेश में अंग्रेजी के अखबार”