Comments : Ganga and her people, Part-3

 

PS Bhopal, built in 1944, Credit: Times of India

चीठिया बाँचे सब कोई 

पाठकों से गप-शप – 3   

छुक-छुक करती रेलगाड़ी

Bidya Shankar Bibhuti : आदमपुर घाट से चलकर भागलपुर रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड. विद्यार्थी जीवन याद आया, ननिहाल जाना याद आया. गंगा तो हम जैसों के लिया दूसरी माँ है. सबकुछ गंगा में -वहीं घर और वहीं खेलमैदान
NK Singh : Whenever I see a river like Ganga, I always remember Mikhail Sholokhov’s Quiet Flow the Don. A cradle for civilisation. I guess it is the same all over the world.

Vishal Chouhan: बहुत ही सुन्दर वर्णन

Zafar Aalam Hashmi: बहुत खूब

Arif Mirza: सर ग़ज़ब अंदाज़े बयां है…गोया के मस्तिष्क में अतीत की फ़िल्म सी चलती है। जैसे ही आलेख की अंतिम पंक्ति पर ये सिलसिला टूटता है तो लगता है ये फ़िल्म थोड़ा और चलती। बधाई आपको।

Arshad Ali Khan: शानदार…

Arvind Malviya: Nostalgic writing.
NK Singh: Nostalgia can often be more heady than a drink.
Arvind Malviya: Agreed

Satyendra Tiwari: अगली कड़ी का इंतजार ।

Vijay Tiwari: पटना अस्पताल की तारीफ़ थी या ख़ामियाँ चिंतन का विषय है मगर आपने बहुत ख़ूबसूरत अन्दाज़ में वर्णित किया है यूँ प्रतीत होता है मानों पाठक भी सफ़र में हैं बधाई भाई साहेब धन्यवाद
NK Singh: रेणु जी लंबे समय तक उस अस्पताल में भर्ती रहे हैं। वे डाक्टरों के प्रति बड़े सहृदय थे।
Vijay Tiwari:  लेखक की हर बात सारगर्भित होती है पाठक अपने हिसाब से लेता है और सही है कि उस वक़्त के डाक्टर वाक़ई भगवान स्वरूप थे. हैवान तो क़तई नहीं थे धन्यवाद प्रतीक्षा है अगले भाग की

Anil Dixit: वाह…

Ramesh Mishra Chanchal: गज़ब

Shashi Kumar Keswani: शानदार भाई

Vijaya Kumar Tewari: बहुत सहजता से डेक की कुर्सी और रेणु जी की कमजोरी का खुलासा किया साधुवाद है

Arvind Malviya: पंडित की ज़ुबान और ठाकुर की तलवार (कलम) की धार कभी कम नहीं होती

Shashi Shekhar: इस मौसम में शांत और निर्मल गंगा को स्टीमर से पार करने का आनंद ही कुछ और होता था…. फिर बरसात में बेहद रोमांचकारी.. मन में डूबने का डर और लहरों की उथल-पुथल… जब तक स्टीमर घाट के किनारे तक न पहुंच जाए दिल धक-धक करता रहता था… गंगा और उसके सफर का बहुत ही सुंदर चित्रण कर रहे हैं सर… बधाई
NK Singh:  सही कह रहे हैं, बरसात में तो गंगाजी का कहीं किनारा ही नहीं नजर आता था।

Ramendra Kumar Sinha: छुक छुक चलती, दिलचस्प कथा-शैली में रिपोर्ताज़

Pankaj Shrivastava: सुंदर गंगा यात्रा सर

Priyadarshan Sharma: ऐतिहासिक संस्मरण

Parshuram Sharma: कुछ पीछे छूट जाते हैं, कोई कितना आगे बढ़ जाता है। बेहतरीन।
NK Singh: कुछ चीजें ऐसी होती हैं कि हम चाहकर भी पीछे नहीं छोड़ पाते है।।

Sanjay Singhai: शानदार स्मृति बिम्ब

Mohan Manglam: बहुत ही सुन्दर और प्रवाहपूर्ण 🙏

Amar Kumar: Adbhut lekhani

Deepak Upadhyaya: सर भागलपुर का अस्पताल भी गंगा किनारे ही है। मायागंज में गंगा किनारे। अगर आपको आईजी कोठी स्मरण हो तो वहीं पर अस्पताल 40 साल से है।
इस लेख में भागलपुर और वहां के घाट का चित्रण रोमांचित करने वाला है साथ ही पुरानी स्मृतियों से धूल भी झिड़कर तरोताजा करने वाला है। भग्गू सिंह घाट जो आदमपुर में सीएम एस स्कूल के पीछे था अतीत हो चुका है। बरारी से भी रेलवे कालोनी के जर्जर मकान को छोड़ सारे चीज समाप्त हो चुके हैं।
NK Singh: अस्पताल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह तो रेणु जी को कोट किया है।

Vishwambhar Shukla: जीवंत संस्मरण….रेणु मेरे प्रिय कथाकार हैं… उनकी रचनाओं की याद दिलाता रहा…
NK Singh: इसमें आगे और भी रेणु आयेगे, और बार बार आयेंगे!

Vinod Purohit: बेहतरीन सर

Ashok Tomar: Sir , very well written article on the steamer service in Bihar. I would like add two things first they used to sell MAKHAN KI GOLI WHICH I USED TO ENJOY. SECONDLY THE TRAIN FROM PAHLEZA USED TO GO TILL SONEPUR AND NOT HAJIPUR.
NK Singh: Thanks for pointing out about the link train’s destination. I shall correct it.

Mahendra Kumar Kushwaha: बेहतरीन

Shrikant Sharma: शब्दों को सही मायने देता हुआ बहुत ही दमदार लेखन

Ajay Bokil: सुंदर..

Mujeeb Faruqui: Waah

Anil Singh Chauhan: बहुत ही सुंदर लेख व चित्रण

Dhananjay Pratap Singh: शानदार सर..!!! प्रणाम

Rajkumar Jain: अद्भुत वर्णन

Om Prakash Singh: बहुत खूब भाई साहब।

GL Sonane: बहुत बढ़िया सर।

Krishan Kant Saxena: अति सुन्दर

Rupesh Singh: Bahut rochak

Vanita Srivastava: Great Sir

नई पाती : चिठिया बाँचे सब कोई – 4 

पुरानी पाती : चिठिया बाँचे सब कोई – 2

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