अटल जी की जादू जगाने की कला

Charisma of Atal Bihari Vajpayee

NK SINGH

भाजपा के प्रमुख प्रचारक और प्रधानमंत्री पद के उसके प्रत्याशी अटल बिहारी वाजपेयी अपनी चुनाव सभाओं में नागरिक सुविधाओं के नाम पर सरकारी कामकाज की खिल्ली कुछ इस तरह उड़ाते हैं:

मैं कहीं जा रहा था कि मैंने एक गड्ढा देखा।

मैंने पूछा,‘सड़क कहां है?‘

लोगों ने कहा,‘गड्ढे में

मैंने पूछा,‘गड्ढा कहां है?‘

उन्होंने कहा,‘सड़क में।

फिर मैंने एक व्यक्ति को उस गड्ढे में…. माफ कीजिएगा, सड़क पर स्कूटर चलाते देखा।

उसकी बीवी पिछली सीट पर बैठी थी। हर दो मिनट बाद वह पीछे मुड़कर उसे छूता था।

मैंने पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहा है।

उसका जवाब था,”मैं  आश्वस्त होना चाहता था  कि वह कहीं गिर तो नहीं गई।“

गोरखपुर, बिजनौर, मुरादाबाद में हर जनसभा में उनका यह चुटकुला लोगों को बहुत पसंद आया। Continue reading “अटल जी की जादू जगाने की कला”

Atal Bihari Vajpayee: A Dove Among Hawks

India Today 31 May 1996

NK SINGH

A FRAMED PHOTOGRAPH OF P.V. Narasimha Rao adorns the spacious dining room of Atal Bihari Vajpayee’s Raisina Road residence in New Delhi.

If anything, it provides an insight into the mind of the new prime minister of India, a politician whose party does not believe that wisdom exists outside the saffron fold.

Vajpayee, 71, has been a votary of the politics of consensus throughout his five decades in public life.

That he is the lone dove among the Hindutva hawks is evident from Vajpayee’s own admission that his biggest weakness is that he can never hit back.

And that, ironically, is also his biggest asset. Continue reading “Atal Bihari Vajpayee: A Dove Among Hawks”