ओल्ड मोंक की बोतल और आधी रात की मुलाक़ात

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Prajatantra 9 Dec 18

A bottle of Old Monk and the midnight tryst

NK SINGH

जब भी मैं आरएसएस के बारे में सोचता हूँ तो भाजपा के भूतपूर्व अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे की छवि आंखों के सामने आ जाती है.

सभ्रांत किसान जैसे दिखने वाले ठाकरे अपनी तपस्वी जैसी जीवन शैली के लिए जाने जाते थे. संघ के ज्यादातर प्रचारकों की तरह ठाकरे भी आजीवन कुंवारे रहे.

अस्सी के दशक की शुरुआत में जब मेरी उनसे पहली मुलाक़ात हुई तो वे पुराने भोपाल के सोमवारा इलाके में पार्टी ऑफिस के नीचे एक कमरे में रहते थे.

कमरे के एक कोने में एक तख़्त पर उनका बिस्तर था, एक मेज थी और आगंतुकों के लिए चंद कुर्सियां. एक घड़ा भी था, जिससे निकालकर आप पानी पी सकते थे.

वह छोटा कमरा उनका शयन कक्ष था, ड्राइंग रूम था, अध्ययन कक्ष था, डाइनिंग रूम था और गेस्ट रूम था.

कभी-कभार जब वे लंच पर मुझे आमंत्रित करते तो बगल के हिस्से में रहने वाले कार्यालय मंत्री कैलाश सारंग के घर से थाली आ जाती थी.

पहले तो सीलिंग फैन भी नहीं था. एक ही टेबल फैन था जिसे सारंगजी का परिवार इस्तेमाल करता था और कभी कोई आगंतुक आ जाये तो उसकी हवा ठाकरेजी की तरफ मोड दी जाती थी.

यह उस प्रभावशाली नेता की जीवन शैली थी जो मुख्यमंत्री बनाने या हटाने की ताकत रखता था.

इसलिए जब संघ परिवार के एक चमकते हुए सितारे, एकनाथ गोरे से भोपाल में मेरी पहली मुलाक़ात हुई तो मैं सकते में आ गया. Continue reading “ओल्ड मोंक की बोतल और आधी रात की मुलाक़ात”