कांग्रेस नेता चन्द्रशेखर ने १९६९ में अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं की आलोचना की

Chandra Shekhar, the ‘Young Turk’ who became PM
Congress ‘Young Turk’ Chandra Shekhar attacks senior party leaders in 1969
NK SINGH

एक दिन बाद ही अखबार या तो रद्दी के ढेर में चला जाता है या फिर मूंगफली का ठोंगा बनाने के काम में आता है. पर वही पुराना अख़बार इतिहास के पहले अनगढ़ ड्राफ्ट का काम भी करता है.

रांची टाइम्स के 20 अप्रैल १९६९ की इस कतरन की हालत बताती है कि पचास साल में अख़बार के पन्ने किस तरह जीर्ण शीर्ण अवस्था को प्राप्त हो जाते हैं. छूने भर से कागज कई टुकड़ों में बिखरने लगते हैं.

इसलिए मैंने अपनी पुरानी कतरनों को डिजिटल फॉर्म में सहेजने का प्रोजेक्ट शुरू किया है.

इस श्रृंखला में पेश है मेरी हिंदी में छपी पहली रिपोर्ट.

१९६९ में  ‘युवा तुर्क’ चंद्र शेखर देश भर के अख़बारों की सुर्ख़ियों पर छाये हुए थे. मोहन धारिया और कृशन कान्त जैसे कांग्रेस के अन्य समाजवादी नेताओं के साथ मिलकर वे संसद में और संसद के बाहर भी अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं पर जम कर हमले कर रहे थे.

उन्होंने संसद में उप प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे. कांग्रेस के दक्षिणपंथी नेताओं ने इसे अनुशासन हीनता करार दिया था. माहौल गरम था. कुछ महीनों बाद ही कांग्रेस का विभाजन होने वाला था.

ऐसे समय में चन्द्र शेखर पटना आये और एक आम सभा में दक्षिणपंथी धड़े के कांग्रेसी नेताओं की आलोचना तो की ही, बिड़ला को भी निशाने पर लिया और पूछा कि वित्त मंत्री की हैसियत से मोरारजी ने बिड़ला का १२ करोड़ इनकम टैक्स माफ़ कैसे कर दिया?

रांची टाइम्स के 20 अप्रैल १९६९ के अंक में उस मीटिंग के बारे में मेरी रिपोर्ट:

Ranchi Times 20 April 1969

 

6 Replies to “कांग्रेस नेता चन्द्रशेखर ने १९६९ में अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं की आलोचना की”

  1. These are the missing links of the history. Must be saved and handed to the coming generations in book form.

    Keep it up bro.

  2. मै बलिया का रहने वाला हूं। चंद्रशेखर हमारे आदर्श व प्रेरणा पुरुष रहे। आपातकाल खत्म होने के बाद चुनाव की घोषणा हुई थी। चंद्रशेखर जनता पार्टी के अध्यक्ष थे। वह बलिया जिले की तहसील बांसडिह आए थे। वहां उनका कार्यक्रम था। तब पहली बार उन्हें मंच से बोलते हुए सुना था। आपकी रिपोर्ट से चंद्रशेखर के व्यक्तित्व की झलक मिल जाती है। चंद्रशेखर जी, अंत तक वैसे ही रह गए थोड़ा भी नहीं बदले। जब प्रधानमंत्री पद से त्याग पत्र दिया था, तब स्वर्गीय राजीव गांधी ने शरद पवार जी को उनके पास भेजकर निवेदन किया था कि वह त्यागपत्र वापस लें। चंद्रशेखर ने शरद पवार जी को यह कहकर वापस कर दिया था कि चंद्रशेखर एक दिन में दो निर्णय नहीं लिया करता। एक बार जब निर्णय ले लेता है तो वह उस पर अमल करता है।
    आपके पुराने लेख भी बहुत ताजगी भरे हैं।
    धन्यवाद।

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