Media’s Love Affair with Rich & Powerful

Niira Radia, corporate lobbyist, – Outlook India

NK SINGH

Published on 4 October 2015

Updated 12 March 2022

With the growth in population, literacy rate and disposable income, the circulation of newspapers has zoomed in the last two decades, especially those published in the Indian languages. It is not rare for chain newspapers to claim a daily circulation is excess of a million copies. A newspaper selling less than a hundred thousand copies is considered a small daily now-a-days. Continue reading “Media’s Love Affair with Rich & Powerful”

तो माट साब जेल में चक्की पीस रहे होते

Children cleaning their school in Singapore

Media promotes wrong values

NK SINGH

Published in Prabhat Kiran and Pradeepak, September 2015

Updated 7 March 2022

गंगौर गांव के प्राइमरी स्कूल की छत उन दिनों खपरैल की हुआ करती थी. पर फर्श कच्ची थी. प्रार्थना के बाद हमारा पहला काम होता था दोनों कमरों को बुहारना. हफ्ते में एक दिन, हर शनिवार को, बच्चे आस-पास से गोबर इकठ्ठा करते थे और फर्श को लीपते थे. काम बढ़ जाता था, इसलिए वह दिन खास होता था. Continue reading “तो माट साब जेल में चक्की पीस रहे होते”

नरेंद्र कुमार सिंह: पत्रकारिता के धूमकेतु

NK Singh

MY EDITOR : NARENDRA KUMAR SINGH 

Prakash Hindustani

प्रकाश हिन्दुस्तानी की वेबसाइट पर ‘मेरे संपादक’ शृंखला में प्रकाशित

एन.के. के नाम से मशहूर नरेन्द्र कुमार सिंह ने पत्रकारिता में अनेक झंडे गाड़े हैं। वे हैं तो बिहार के लेकिन उनका कर्म क्षेत्र पूरा भारत की रहा है, जिसमें से मध्यप्रदेश में उन्होंने अपनी सेवाओं लम्बे समय तक दी और अब वे मध्यप्रदेश के ही निवासी हो गए हैं। Continue reading “नरेंद्र कुमार सिंह: पत्रकारिता के धूमकेतु”

स्मृति के पुल : गंगा बहती हो क्यों . . . 1

A steamer near Pahleja Ghat, Bihar, Courtesy – Wikipedia

Ganga and her people – 1

NK SINGH

Published in Amar Ujala 23 January 2022

तब गंगा में लाशें नहीं तैरा करती थीं। स्टीमर चला करते थे। पटना में गंगा पर पुल बनने के बाद स्टीमर की यात्रा का रोमांस जाता रहा। पर आज भी जब गंगा टपने के लिए इस पुल से गुजरते हैं, नजर बरबस पहलेजा घाट की तरफ घूम जाती है।

वहाँ से किसी जमाने में ये स्टीमर चला करते थे। कानों में जहाज का भोंपू सुनाई देता है। … ए कुली, थोड़ा फुर्ती से, जहाज खुलने वाला है। छूट गया तो रात भर झूलते रहो।

अब तो पटना में गंगा टपने के लिए दो-दो पुल हो गए हैं, तीसरे की तैयारी है. पर पहले इसी पहलेजा घाट से पानी का जहाज पकड़कर ही नदी के उस पार जाया जा सकता था। Continue reading “स्मृति के पुल : गंगा बहती हो क्यों . . . 1”