बिहार के अली बाबा और ४० चोर

Ali Baba and 40 Thieves by Albert Goodwin, Courtesy Tate Gallery

मध्यावधि चुनाव के परिणाम स्वरुप बिहार के राजनीति में जो अस्थिरता आई, वह अभी बरक़रार है. चुनाव में बिहार की जनता ने किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं दिया.

आपसी फूट के कारण विरोधी दल इस स्थिति में नहीं थे कि सरकार बना सकें. अतः कांग्रेस को सरकार बनने का अवसर मिला और  उसने तथाकथित समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ मिलकर साझा सरकार बनायीं.

विरोधी दलों के अनुसार मुख्यमंत्री सरदार हरिहर सिंह पंचनायकों — कृष्णवल्लभ सहायमहेश प्रसाद सिंहसत्येन्द्र नारायण सिंहअम्बिका शरण सिंह एवं रामलखन सिंह यादव — के अपने खास आदमी हैं.

कांग्रेस सरकार को हाल में दो बार फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

जब सरकार ने पुराने भ्रष्टाचार की जाँच कर रहे अय्यर और मधोलकर कमीशन की ‘सहायता’ के लिए ‘निर्देश समिति’ बनायीं तो विरोधी दलों ने ऐसा तूफ़ान उठाया कि मुख्यमंत्री को मजबूर होकर समिति भंग करनी पड़ी.

आरोप था कि यह समिति कमीशन की जांचा का सामना कर रहे नेताओं की चमड़ी बचने के लिए गठित की गयी है.

फिर एक नयी मुश्किल आई — विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारियों की हड़ताल. २१ अप्रैल को सरकार ने शिक्षकों की अधिकतर मांगे मान ली.

मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि उनके मंत्रीमंडल में ४० सदस्य रहेंगे. इसपर अख़बारों में कार्टून छपे और सुर्खियाँ बनीं — “अली बाबा और ४० चोर”.

Excerpts from NK Singh’s dispatch in Mashal, 3 May 1969 — Bihar Chief Minister Sardar Harihar Singh’s Congress-led shaky coalition Government will have a 40-strong Ministry, reminding people of Ali Baba and 40 thieves.

Mashal 3 May 1969

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