आदिवासी: गांधी शताब्दी-वर्ष और ये पाँच करोड़ वनवासी

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Schedule Tribes: Gandhi Centenary and our five crore forest dwellers

NK SINGH

यदि प्रदर्शनों और आंदोलनों से ही समस्या की गहराई को आँका जाए तो कहा जा सकता है कि  भारत में आदिवासियों कि कोई समस्या नहीं है और यदि है भी तो वह (कोई) ज्यादा गहरी नहीं है। लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि भारत में बसने  वाले इन पाँच करोड़ वनवासियों की समस्या बहुत गहरी है.

प्रत्येक प्रादेशिक सरकार को जंगलों से लाखों रुपए की आय होती है। यह बात जितनी सही है उतनी ही सही यह बात भी है कि जंगलों में बसने वाले इन आदिवासियों के घर कई-कई दिन हांडी नहीं चढ़ती। Continue reading “आदिवासी: गांधी शताब्दी-वर्ष और ये पाँच करोड़ वनवासी”

छोटानागपुर: ‘खटु आमे दुनिया, हेलु आमे चिर दुखिया’

Jaipal Singh, founder of Jharkhand Party. Pic credit velivada
Jaipal Singh, founder of Jharkhand Party. Pic credit velivada

Hills of Chotanagpur are ablaze as adivasis revolt against exploiters

 NK SINGH

छोटानागपुर की हरी-भरी पहाड़ियाँ पिछले साल से मुखरित हो उठी हैं। गत वर्ष आदिवासियों के एक हिस्से ने बिरसा सेवा दल के नेतृत्व में एक सफल आंदोलन चलाया। उन दिनों रांची में प्रायः रोज ही प्रदर्शन हुआ करते थे, जिनमें पचासों मील पैदल चल कर आदिवासी नौजवान, बच्चे-बूढ़े, औरतें और लड़कियां अपने पारंपरिक हथियारों का प्रदर्शन करते हुए भाग लिया करते थे। Continue reading “छोटानागपुर: ‘खटु आमे दुनिया, हेलु आमे चिर दुखिया’”

पलामू: एक बार फिर अकाल के चंगुल में

Palamu has 3 major rivers. But it has remained drought prone area as few irrigation facilities were created. Pic credit Jharkhand Govt
A pond in Palamu. Pic credit Jharkhand Govt
NK SINGH

 Palamu in grip of famine

पलामू पर फिर अकाल मंडराने लगा है। देश ने बिहार (अब झारखंड) के इस सबसे छोटे जिले का नाम 1966-67 के अकाल के दौरान जाना था। उस बार अकाल की विभीषिका सबसे घोर यहीं थी।

इस बार भी जिले की पूरी फसल सूखे की चपेट में या गई है। और आसरा इस जिले को बस एक खेती का ही है. उद्योग के नाम पर ले-देकर एक जापला सिमेन्ट कारखाना है। Continue reading “पलामू: एक बार फिर अकाल के चंगुल में”