JMM Payoffs: Defection Scandal

A Jharkhand MP claims he and three others received money to bail out the Rao Government in a 1993 no-trust motion as allegations are made that hawala funds were used to buy four crucial votes

Shibu Soren

 N.K. SINGH

MYSTERIOUS MONEY

  • Four JMM MPs who opposed a notrust motion on July 28, 1993, deposited more than Rs.1.60 crore on August 1 and 2 in the same bank in Delhi.
  • The petition alleges that on August 1, 1993, Rs.30 lakh was deposited in Suraj Mandal‘s account.
  • Shailendra Mahato says that three days after they voted for the Government, Mandal gave him Rs.40 lakh, saying that the money came from Rao.
  • On August 1, 1993, Rs.30 lakh was deposited in the account of JMM MP Shibu Soren, his wife, and Hemant Kumar and Basant Kumar. On the same day, Rs.30 lakh was deposited in the name of the four JMM MPs and Rs.12 lakh in the name of Simon Marandi and his wife. Next day, Rs.21 lakh more was deposited in their account.

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“मैं तो साहब बन गया” : सीएम के साले संजय मसानी का सियासी सफ़र

Sanjay Singh Masani

Shivraj Singh Chouhan’s brother-in-law shifts from BJP to Congress

NK SINGH

वारासिवनी: कांग्रेस उम्मीदवार संजय सिंह मसानी वोट कितने बटोरेंगे, कहना मुश्किल है, पर वे तालियाँ खूब बटोर रहे हैं. मसानी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले हैं. चुनाव के ठीक पहले उन्होंने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा. Continue reading ““मैं तो साहब बन गया” : सीएम के साले संजय मसानी का सियासी सफ़र”

मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव २०१८ : कैसे कांग्रेस ने सुनहरा मौका खोया

Dainik Bhaskar 13 December 2018

MP assembly election 2018: a tale of missed opportunity

NK SINGH

कांग्रेस अगर २०१३ के मुकाबले अपनी सीटों में लगभग दोगुना इजाफा कर पाई है तो इसपर उसे इठलाने की जरूरत नहीं. भले उसे भाजपा से ५ सीटें ज्यादा हासिल हुई हों, पर वोटिंग परसेंटेज देखें तो कांग्रेस को भाजपा से कम वोट मिले हैं!

सही है, पांच साल पहले उसके और भाजपा के बीच आठ परसेंट वोटों का फासला था और उस बड़े अंतर को पाटने में वह कामयाब रही है. पर बहुमत से दो सीट पीछे रह जाना उसे हमेशा सालता रहेगा.

इस खंडित जनादेश के लिए कांग्रेस खुद जिम्मेदार है. वह अपने पत्ते अच्छी तरह खेलती तो नतीजे अलग हो सकते थे. Continue reading “मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव २०१८ : कैसे कांग्रेस ने सुनहरा मौका खोया”

बसपा, सपा, गोंडवाना से हाथ नहीं मिलाकर कांग्रेस ने गलती की

Fragmented Opposition helps BJP in Vindhya

NK SINGH

चित्रकूट: तुलसीदास ने लिखा है कि राम जब इन जंगलों से गुजरे थे तो उन्हें पहचान कर नदी, वन, पहाड़ और दुर्गम घाटियों ने खुद रास्ता दिया और बादलों ने आकाश में छाया की. मानस से शुरू यह सफ़र विन्ध्य की टूटी-फूटी सड़कों की धूल फांकते हुए कब राग दरबारी के विद्रूप में बदल गया, पता ही नहीं चला. Continue reading “बसपा, सपा, गोंडवाना से हाथ नहीं मिलाकर कांग्रेस ने गलती की”

तीन हाई प्रोफाइल चेहरे अपने गढ़ बचाने में जुटे

Nagod fort

Three high profile candidates fighting to save their turf

NK SINGH

सतना: अमरन नदी के किनारे नागौद रियासत का खूबसूरत किला मध्यकालीन स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है.

भरहुत पत्थरों से बने इस किले के पास ही उड़दान गाँव है. गाँव के दलित मोहल्ले में एक कुर्सी पर नागौद रियासत के वंशज नागेन्द्र सिंह बैठे हैं. नीचे फर्श पर मोहल्ले के कुछ लोग बैठे हैं. गली में दलित नवयुवकों का जमावड़ा है. Continue reading “तीन हाई प्रोफाइल चेहरे अपने गढ़ बचाने में जुटे”

विन्ध्य में सरकारी योजनाओं की घर-घर पैठ ; और मामा को भी सब जानते हैं

Dainik Bhaskar 18 November 2018

Tribal voters in Vindhya Pradesh for Shivraj Mama

NK SINGH

उमरिया : बैहर बैगा पाँव से भले लाचार हों, पर दिमाग उनका तेज चलता है. वे हमारे सामने उन उपहारों की एक लम्बी लिस्ट रख देते हैं जो फूल छाप सरकार ने उन्हें दिए हैं – एक एकड़ जमीन, ३०० रूपये का विकलांग पेंशन, ५५ रूपये में बिजली, बच्चों की ड्रेस और दोपहर का खाना और लगभग मुफ्त के भाव २० किलो गेंहूँ, १५ किलो चावल और ४ लीटर किरासन तेल.

पहाड़ों और जंगलों के बीच बसे सिंहपुर गाँव के इस अनपढ़ आदिवासी को यह भी मालूम है कि इस सरकार को कौन चलाता है: “फूल छाप आदिवासी के मान करत.  मामा पट्टा दिए.”

बैहर को यह नहीं मालूम कि चुनाव मैदान में कौन उम्मीदवार खड़ा है, पर उनको लगता है कि फूल छाप जीतेगा.

भाजपा की तारीफ तो वे करते हैं, पर आदिवासियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का श्रेय कांग्रेस को भी देते हैं, हालाँकि उस पार्टी का नाम उन्हें नहीं मालूम. पर वे जोर देकर कहते हैं मदद की शुरुआत पंजा ने किया था, अब फूल छाप दे रहा है.

बड़े सरल शब्दों में  वे भारतीय लोकतंत्र की सफलता की कहानी सुना देते हैं. Continue reading “विन्ध्य में सरकारी योजनाओं की घर-घर पैठ ; और मामा को भी सब जानते हैं”

विन्ध्य में गरीबी की कीचड में खिल रहा है कमल

Dainik Bhaskar 16 November 2018

Poor and Dalits are happy with Shivraj Govt

NK SINGH

शहडोल: ब्योहारी में किराना की छोटी दुकान चलाने वाले मनोज गुप्ता एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ फट पड़ते हैं. दुकान पर आने वाले लोग भी उनकी हाँ में हाँ मिलाकर कहते हैं कि नोटबंदी और जीएसटी ने काम-धंधा चौपट कर दिया है. सड़कों की हालत ख़राब है. बिना लिए-दिए कोई काम नहीं होता. वे भविष्यवाणी करते हैं कि भाजपा सत्ता में वापस नहीं आएगी.

बाजारों में, सड़कों पर और मिडिल क्लास बस्तियों इसी तरह की आवाजें सुनने मिलती हैं, पर जैसे ही हम कच्ची बस्तियों और अतिक्रमण कर बनाये टपरों की तरफ रूख करते हैं, सीन बदल जाता है. गरीब, खासकर दलित गरीब, भाजपा से जुड़ाव महसूस करता है. Continue reading “विन्ध्य में गरीबी की कीचड में खिल रहा है कमल”

चुरहट में ब्राह्मण ही ठाकुरों के तारणहार

Dainik Bhaskar 15 November 2018

MP assembly election 2018, Dateline Churhat

NK SINGH

सीधी: अमेरिका से बेहतर सड़कों पर चलते हुए चित्रकूट से सीधी तक के सफ़र में पिछले चार दिनों में कई बार राम याद आ गए. टोल वाली सड़कों को छोड़कर इक्का-दुक्का सड़कें ही साबूत मिलीं.

राम तो इस चुनावी यात्रा में नहीं मिले, कंप्यूटर बाबा जरूर मिले, जो अपना कमंडल लेकर घूम रहे हैं. पर विन्ध्य में कमंडल पर मंडल भारी है. कुछ राजनीतिक बिम्बों से इसे समझने की कोशिश करते हैं.

  • रामपुर नैकिन के उंघते हुए कस्बे में शाम के झुटपुटे में भाजपा के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन हो रहा है. एक छोटे से कमरे में २५-५० वर्कर इकठ्ठा हैं. सीधी जिले के भाजपा अध्यक्ष राजेश मिश्रा कार्यकर्ताओं को भरोसा दिला रहे हैं कि चुरहट से इस बार नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की हार पक्की है.
  • जिस हाल में मिश्रा भाषण दे रहे हैं, वहां केवल तीन कुर्सियां लगी हैं. एक कुर्सी पर वे खुद बैठे हैं, दूसरी पर कोई शुक्ला और तीसरी पर शारदेंदु तिवारी. कार्यालय प्रभारी का परिचय कराया जाता है. वे भी ब्राह्मण हैं. भाजपा उम्मीदवार तो ब्राह्मण हैं ही!
  • कुछ किलोमीटर दूर नैकिन गाँव में अजय सिंह का जनसंपर्क चल रहा है. एक जगह गाँव के लोग इकठ्ठा हुए हैं. वहां से पांच बार चुनाव जीत चुके अजय सिंह बघेली में लोगों से कहते है, “अबकी हवा चलत है कि सरकार बनही.” वे लोगों को बताते हैं कि उनके परिवार का गढ़ होने की वजह से बाहर वाले सोचते हैं कि चुरहट में राजपूतों की भरमार होगी.
  • फिर मेरी तरफ देखते हुए वे लाउडस्पीकर पर ही कहते हैं कि लोगों को मालूम नहीं कि यहाँ केवल १५ हज़ार ठाकुर हैं जबकि उससे तीन गुना ब्राह्मण हैं. उनके एक समर्थक, राकेश सिंह, जो पास के ही गाँव में रहते हैं बताते है कि नैकिन में ठाकुरों के केवल एक या दो घर हैं.

पर ऐसा नहीं कि भाजपा जाति की राजनीति कर रही है और कांग्रेस उससे परे है. शिवबहादुर सिंह और अर्जुन सिंह के बाद अजय सिंह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं. Continue reading “चुरहट में ब्राह्मण ही ठाकुरों के तारणहार”

जात पर भी, पात पर भी और राजाजी की बात पर भी

Dainik Bhaskar 14 November 2018

The dynamics of caste politics in semi-feudal Vindhya Pradesh

 NK SINGH

रीवा: शहर की बीचों-बीच स्थित बघेल राजवंश के मशहूर किले में पुष्पराज सिंह राजनीतिक गुणा-भाग बता कर मुझे यकीन दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्यों कांग्रेस का पलड़ा इस चुनाव में भारी है. “भाजपा इसलिए कमजोर है क्योंकि कांग्रेस की सारी बीमारियाँ वहां चली गयी हैं,” वे कहते हैं.

कमरे की दीवारों पर पिछली सदी के फोटोग्राफ टंगे हैं जिनमें उनके पूर्वजों समेत दूसरे राजा-महाराजा नज़र आ रहे हैं. पुष्पराज सिंह कांग्रेस पार्टी के नेता तो हैं ही, रीवा राजघराने की  ३६वीं पीढ़ी के वारिस भी हैं.

विन्ध्य की सबसे बड़ी यह रियासत ३४,००० वर्ग किलोमीटर में फैली थी. कांग्रेस के टिकट पर तीन बार चुनाव जीत कर वे दिग्विजय-सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

इस चुनाव में पुष्पराज सिंह मैदान में नहीं हैं. पर उनके पुत्र दिव्यराज सिंह, जो सिरमौर से भाजपा विधायक हैं, फिर से चुनाव लड़ रहे हैं.

रीवा देश के पोलिटिकल राजघरानों में से एक है. तीन पीढ़ियों से वे राजनीति कर रहे हैं. दिव्यराज के बाबा महाराजा मार्तंड सिंह तीन बार कांग्रेस के सांसद चुने गए थे. दादी ने भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था. Continue reading “जात पर भी, पात पर भी और राजाजी की बात पर भी”

विन्ध्य में राजनीतिक गोत्र बदलते रहते हैं, नहीं बदलती है तो बदहाली

Dainik Bhaskar 13 November 2018

A political pilgrimage from Communist Party to BJP

NK SINGH

रीवा: देवतालाब के भाजपा विधायक गिरीश गौतम हर साल जाड़ों में अपने विधान सभा क्षेत्र का साइकिल से दौरा करते हैं. महीने भर एक पंचायत से दूसरी पंचायत साइकिल से जाते हैं. रात को गाँव में ही सो जाते हैं. उनके साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं का हुजूम अगले पड़ाव तक उन्हें छोड़ने जाता है.

जनता से जुड़ने की इस हुनर की वजह से वे २००३ में विन्ध्य के दिग्गज कांग्रेसी नेता श्रीनिवास तिवारी को परास्त कर चुके हैं. भाजपा में इस तरह काम करने वाले लोग थोड़े कम ही दीखते हैं.

गौतम  लम्बे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी के कार्ड होल्डर थे. लाल झंडा थामे हुए वे एक दफा चुनाव कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर भी लड़ चुके है.

देवतालाब से ही कांग्रेस ने विद्यावती पटेल को खड़ा किया है, जो पहले बसपा के टिकट पर चुनाव लडती और जीतती रही हैं. इलाके में कोई भी उन्हें कांग्रेसी नेता के रूप में नहीं जानता. लगातार उन्हें बसपा नेता के रोल में देखने वाले वोटर कंफ्यूज हैं.

विन्ध्य के नेताओं को देखने से ऐसा कोलाज़ बनता है जिसमें सारे चेहरे गड्ड-मड्ड हो जाते हैं. इस दफा भी मैदान में कम उम्मीदवार हैं, जिन्हें आप खांटी कांग्रेसी या खांटी भाजपाई कह सकते हैं. यहाँ सारी पार्टियों के दरवाजे एक-दूसरे के लिए खुले रहते हैं. Continue reading “विन्ध्य में राजनीतिक गोत्र बदलते रहते हैं, नहीं बदलती है तो बदहाली”